अवैध धर्मांतरण के आरोपित स्वयंभू पीर छांगुर उर्फ जलालुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां लगातार गिरोह की जांच पड़ताल में जुटी
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रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर
उतरौला (बलरामपुर)अवैध धर्मांतरण के आरोपित स्वयंभू पीर छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां लगातार गिरोह की परतें उधेड़ रही हैं। शुक्रवार को जहां एटीएस की टीम आरोपी छांगुर को लेकर उतरौला के मधपुर स्थित उसकी कोठी पर पहुंची थी, वहीं शनिवार को पूछताछ का सिलसिला कोतवाली स्तर तक आ पहुंचा।शनिवार को एटीएस टीम उतरौला कोतवाली पहुंची और छांगुर बाबा से जुड़े संपत्ति लेन-देन के मामलों की गहन छानबीन की। इस दौरान उस जमीन, मकान और शोरूम से संबंधित लोगों को कोतवाली बुलाया गया, जिन्होंने पूर्व में छांगुर को संपत्तियां बेची थीं। टीम ने इन विक्रेताओं से एक-एक कर पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की कि छांगुर ने संपत्तियां किस स्रोत से खरीदीं, किसके माध्यम से सौदे हुए और भुगतान की प्रक्रिया क्या रही।एटीएस की प्राथमिकता यह पता लगाने की है कि आखिर छांगुर ने बीते कुछ वर्षों में इतनी बड़ी मात्रा में जमीन और संपत्तियां कैसे अर्जित कर लीं। साथ ही इस मामले में किसी राजनीतिक या रसूखदार व्यक्ति की मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार टीम ने शनिवार को कई जरूरी दस्तावेज और सौदे से संबंधित कागजात भी जब्त किए।गौरतलब है कि शुक्रवार को एटीएस ने छांगुर को लेकर उसकी गिराई गई आलीशान कोठी में करीब 40 मिनट तक पड़ताल की थी। वहां भी कई अहम सुराग हाथ लगे हैं, जिन्हें खंगालते हुए अब छांगुर के पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की तैयारी की जा रही है।सूत्रों के अनुसार इस मामले में कई सफेदपोश और क्षेत्रीय प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। एटीएस की पूछताछ का दायरा जल्द ही और विस्तार ले सकता है। एजेंसी अब हवाला, धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और विदेशी फंडिंग जैसी संभावनाओं की भी जांच कर रही है।अब केवल धर्मांतरण का मामला न रहकर बहुस्तरीय आर्थिक और सामाजिक अपराध की गुत्थी बनता जा रहा है, जिसे सुलझाने में एटीएस सहित अन्य जांच एजेंसियां जुट गई हैं।