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छात्राओं ने छात्रों की कलाई पर बांधी राखी, छात्रों ने उपहार देकर लिया रक्षा का संकल्प

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रिपोर्ट -राम चरित्र वर्मा

टाइनी टॉट्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में धूमधाम से मनाया गया भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतीक रक्षा बंधन का त्यौहार

रक्षा बंधन का पर्व धर्म जाति से ऊपर है, यह भाई बहन के पवित्र प्यार का त्यौहार है : मनीष कुमार सिंह

राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं : सैफ अली

उतरौला (बलरामपुर)।उतरौला बाजार में स्थित टाइनी टॉट्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतीक रक्षा बंधन का त्यौहार शुक्रवार को रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर विद्यालय परिसर में धूमधाम से मनाया गया तथा छात्राओं ने अपनी कक्षा के छात्रों की कलाई पर राखी बांधी। छात्रों ने भी उन्हें बहन मानकर उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया और उन्हें उपहार दिए। रक्षाबंधन कार्यक्रम की शुरुआत हिंदी के अध्यापक भुवनेश्वर तिवारी ने येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥ श्लोक से किया तथा इसका हिन्दी भावार्थ बताते हुए कहा कि इस स्लोक का अर्थ है “जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना, तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न होना।”इस अवसर पर राखी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें छात्र – छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों जैसे राखी शुभकामना कार्ड निर्माण, राखी बनाओ, राखी की थाली सजावट व रंगोली आदि अंतर सदन प्रतियोगिताओं में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। छात्राओं ने प्रतियोगिता में रंग बिरंगी राखी बनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य मनीष कुमार सिंह ने कहा कि रक्षा बंधन का पर्व धर्म जाति से ऊपर है। यह भाई बहन के पवित्र प्यार का त्यौहार है। मनीष कुमार सिंह ने बच्चो को मेवाड़ का प्रसंग सुनते हुए कहा कि एक बार की बात है कि मेवाड़ की रानी कर्मवती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लड़ऩे में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूँ ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मवती व उसके राज्य की रक्षा की। एक अन्य प्रसंगानुसार सिकन्दर की पत्नी ने अपने पति के हिन्दू शत्रु पुरूवास को राखी बाँधकर अपना मुँहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकन्दर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बँधी राखी और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकन्दर को जीवन-दान दिया। विद्यालय के डायरेक्टर सैफ अली ने इस अवसर पर कहा कि एक बार की बात है कि जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिये राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं। महाभारत में भी रक्षाबन्धन से सम्बन्धित श्री कृष्ण और द्रौपदी का एक कहानी मिलता है। जब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी उंगली में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यापक अनिल कुमार गुप्ता, महेश कुमार गुप्ता,राशिद हुसैन, दिनेश कुमार, भूपेंद्र कुमार सिंह, राशिद अब्बास, अफरोज, अमित मिश्रा, स्वाति नाग, कामेश्वर दत्त तिवारी, शिव शंकर गुप्ता, शिवानंद तिवारी, व रियाजुद्दीन मौजूद रहे।

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