एमपीपी इंटर कॉलेज में छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया
रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर
बलरामपुर।आज दिनांक 06.12.2025 को पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार के निर्देशन में तथा अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडे एवं क्षेत्राधिकारी यातायात डी.के. श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में प्रभारी यातायात उमेश सिंह द्वारा टीम सहित एमपीपी इंटर कॉलेज बलरामपुर में जागरूकता कार्यक्रम संचालित किया गया।कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य, सहायक अध्यापकगण तथा एनसीसी के छात्र-छात्राओं की मौजूदगी में यातायात नियमों एवं सड़क सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गईं। यातायात पुलिस टीम ने छात्रों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा सुरक्षित यातायात व्यवहार के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। सबसे पहले हेलमेट एवं सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग पर जोर देते हुए बताया गया कि दोपहिया वाहन पर चालक और पीछे बैठा व्यक्ति दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य है, वहीं चारपहिया वाहनों में आगे और पीछे बैठे सभी यात्रियों को सीट बेल्ट अवश्य लगानी चाहिए।ओवरस्पीडिंग को दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताते हुए छात्रों को निर्धारित गति सीमा में ही वाहन चलाने की सलाह दी गई। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करने पर विशेष बल देते हुए बताया गया कि मोबाइल के कारण ध्यान भटकने से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। रॉन्ग साइड ड्राइविंग के दुष्परिणामों पर चर्चा करते हुए छात्रों को बताया गया कि गलत दिशा में वाहन चलाने से आमने-सामने टक्कर की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।कार्यक्रम के दौरान छात्रों को सुरक्षित एवं जिम्मेदार यातायात व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें ज़ेब्रा क्रॉसिंग, ट्रैफिक सिग्नल, स्टॉप लाइन और फुटपाथ के सही उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह सड़क पर चलते समय अनुशासन और यातायात नियमों का पालन करे, जिससे स्वयं की सुरक्षा के साथ–साथ दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में शुरुआती उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें भविष्य में जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना था। यातायात पुलिस बलरामपुर द्वारा ऐसे कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि सड़क सुरक्षा के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता पैदा की जा सके।