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डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चौराहा पर सुलभ शौचालय होने की उठी आवाज

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

उतरौला (बलरामपुर)सबसे पुरानी तहसील उतरौला आज भी बुनियादी सुविधाओं की दावेदारी में पिछड़ रही है। तहसील मुख्यालय के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चौराहा पर प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों का आवागमन होता है। यह मार्ग बलरामपुर तथा गोंडा जिलों को जोड़ता है, जिसमें महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों की भी बड़ी संख्या शामिल रहती है।डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चौराहा पर स्थित है प्रसिद्ध बाबा फक्कड़ दास मंदिर, जहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना व दर्शन के लिए पहुंचते हैं।हालांकि, इस अत्यंत व्यस्त चौराहे पर आज तक एक भी सार्वजनिक सुलभ शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और यात्रियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।यह चौराहा न केवल ट्रैफिक का मुख्य केंद्र है, बल्कि सुबह से लेकर शाम तक यहां घंटों यातायात बना रहता है। इसके बावजूद सबसे आवश्यक एवं मूलभूत सुविधा सार्वजनिक शौचालय का घोर अभाव है।शौचालय की कमी का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं, किशोरियों, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। महिलाओं को विशेष रूप से असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जबकि बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति शारीरिक व मानसिक परेशानी का कारण बन रही है। स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों को भी शौचालय न होने के कारण निरंतर कठिनाइयों से जूझना पड़ता है।वैवाहिक व धार्मिक आयोजनों में भी बढ़ती है परेशानी।स्थानीय लोगों ने एक और महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाया है कि बाबा फक्कड़ दास मंदिर केवल दैनिक पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि नगर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए एक प्रमुख धार्मिक व सामाजिक केंद्र भी है।इस मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग अपने पुत्र-पुत्री के विवाह से पूर्व गोद भराई, या वर वधू के छींके, तथा अन्य छोटे-मोटे वैवाहिक एवं पारिवारिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन अवसरों पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की उपस्थिति और अधिक बढ़ जाती है, लेकिन शौचालय की कोई व्यवस्था न होने से उन्हें भारी असुविधा झेलनी पड़ती है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे आयोजनों के दौरान बाहर से आने वाले मेहमानों को शौचालय न मिल पाना नगर की छवि को भी प्रभावित करता है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर पालिका परिषद उतरौला और संबंधित जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई।स्थानीय महिला संगठनों और युवा समुदाय का कहना है कि यह चौराहा महिलाओं और किशोरियों के लिए अत्यंत असुविधाजनक और असुरक्षित बन चुका है। उन्हें न तो सुरक्षित और न ही स्वच्छ शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो पा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय की कमी केवल स्वच्छता की समस्या नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानवीय गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।खुले में शौच से संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है, वहीं महिलाओं के लिए यह स्थिति सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिमपूर्ण हो जाती है।स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चौराहा पर तत्काल सुलभ शौचालय का निर्माण किया जाए, अलग-अलग महिला एवं पुरुष शौचालय बनाए जाएं, हैंड वॉश व स्वच्छता धारा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, शौचालयों का निरंतर रखरखाव एवं सफाई कराई जाए।एक स्थानीय व्यापारी ने कहा यह जगह इतनी भीड़-भाड़ वाली है, फिर भी एक बुनियादी जरूरत शौचालय उपलब्ध नहीं है। प्रशासन को तत्काल कदम उठाना चाहिए।उतरौला तहसील एक विकासशील एवं ऐतिहासिक केंद्र होने के बावजूद आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चौराहा पर सुलभ शौचालय का अभाव केवल एक सुविधा की कमी नहीं, बल्कि यह सुरक्षा, सम्मान और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर जनहित का मुद्दा बन चुका है।

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