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चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप: नवजात के बाद प्रसूता की भी मौत

रिपोर्ट – ब्यूरो गोण्डा

गोण्डा। नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित जीवनदीप चिकित्सालय में इलाज के दौरान नवजात शिशु और प्रसूता की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जनपद के पयागपुर क्षेत्र निवासी 30 वर्षीय पूजा सिंह को 6 फरवरी को तबीयत खराब होने पर जीवनदीप चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति सामान्य बताते हुए उन्हें घर भेज दिया। इसके बाद 10 फरवरी तक सुबह-शाम जांच और इंजेक्शन के लिए अस्पताल लाया जाता रहा। बताया जाता है कि 10 फरवरी की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां ऑपरेशन के माध्यम से डिलीवरी कराई गई। इस दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद भी प्रसूता को अस्पताल में ही भर्ती रखा गया और उपचार जारी रहा। परिजनों का कहना है कि पिछले पांच दिनों से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके चलते प्रसूता की भी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और परिजन आक्रोशित हो उठे। मृतका के देवर रामसिंह ने बताया कि ऑपरेशन के बाद भी डॉक्टरों ने स्थिति सामान्य बताई थी, जबकि उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते उचित उपचार नहीं दिया गया, जिसके कारण पहले नवजात और फिर प्रसूता की जान चली गई। परिजनों ने दोषी चिकित्सकों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना की सूचना मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक जानकारी जुटाते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है, तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं जीवनदीप चिकित्सालय की डॉक्टर सुवर्णा कुमार ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मरीज की स्थिति पहले से ही गंभीर थी। चिकित्सकों द्वारा समुचित इलाज किया गया, लेकिन अत्यधिक जटिलता के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है। फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। नवजात शिशु और प्रसूता की मौत के मामले ने न केवल अस्पताल प्रबंधन, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। परिजनों के आरोपों के बीच अब स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

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