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बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड: 23 साल की नौकरी गई — “अब बच्चों का पेट कैसे पालूं?”

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

बलरामपुर, उत्तर प्रदेश।23 वर्षों तक मशीन ऑपरेटर के रूप में कार्यरत एक स्थायी कर्मचारी की जिंदगी अचानक संकट में आ गई, जब उसे कथित तौर पर बिना नोटिस नौकरी से बाहर कर दिया गया। पीड़ित कर्मचारी का कहना है, “23 साल तक पूरी ईमानदारी से काम किया… कभी छुट्टी तक नहीं ली, लेकिन आज अचानक मुझे ही बाहर कर दिया गया। अब अपने बच्चों का पेट कैसे पालूं?”
बीमारी के बाद बदला माहौल पीड़ित के अनुसार, 2 फरवरी 2026 को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसने मिल प्रबंधन को सूचना देकर इलाज हेतु छुट्टी ली।लगभग 15 दिन इलाज के बाद जब वह स्वस्थ होकर ड्यूटी ज्वाइन करने पहुंचा, तो हालात बदले हुए मिले।कर्मचारी का आरोप है कि प्रबंधक डी.के. सिंह द्वारा उसे एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया। बिना पढ़े हस्ताक्षर करने से इंकार करने पर उसे नौकरी से निकालने और परिसर में प्रवेश न देने की चेतावनी दी गई। घटना से आहत कर्मचारी कथित रूप से वहीं बेहोश हो गया, जिसके बाद उसे एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया।
श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप पीड़ित का दावा है कि यह कार्रवाई श्रम कानूनों और स्थायी आदेशों के विरुद्ध है। उसका कहना है कि मिल में अन्य कर्मचारियों के साथ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जा रही है और श्रमिक संगठनों को कमजोर कर दिया गया है, जिससे मजदूर अपनी आवाज उठाने में असमर्थ हो गए हैं।परिवार पर संकट कर्मचारी घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य है। छोटे बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और दवाइयों की जिम्मेदारी उसी पर है। नौकरी छिनने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।“रातों की नींद उड़ गई है… समझ नहीं आ रहा कि घर कैसे चलेगा,” वह कहता है।आत्मदाह की चेतावनी न्याय की मांग को लेकर कर्मचारी ने मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है। उसने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उसकी बहाली नहीं हुई, तो वह मिल के मुख्य गेट पर आत्मदाह करने को मजबूर होगा।यह चेतावनी उसकी मानसिक पीड़ा और निराशा को दर्शाती है।
प्रशासन का पक्ष इस पूरे मामले में अभी तक मिल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। यदि प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।अब बड़ा सवाल यह है:क्या 23 वर्षों की सेवा देने वाले इस कर्मचारी को न्याय मिलेगा, या उसकी पुकार व्यवस्था के शोर में दब जाएगी?

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