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भाजपा में कैडर के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर उठे सवाल,पुराने चेहरों को दरकिनार करने का आरोप

रिपोर्ट आचार्य स्कन्द दास

महानगर अध्यक्ष व सदर विधायक पर दूसरे दलों से आए लोगों को उपकृत करने का लग रहा आरोप

अयोध्या ।भारतीय जनता पार्टी के भीतर संगठनात्मक कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष के स्वर तेज होते नजर आ रहे हैं। पार्टी के समर्पित और लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं को दरकिनार किए जाने का मुद्दा अब खुलकर सामने आने लगा है। कमलाकांत सुंदरम, विनोद श्रीवास्तव, दुर्गा पांडेय, दुर्गेश पांडेय, रमाकांत विश्वकर्मा, आलोक मिश्रा, लाल जी मिश्रा, वीरचंद मांझी,कमल उपाध्याय, राधारमण त्रिपाठी, आलोक सिंह,श्याम नारायण तिवारी और कौशलेंद्र झा जैसे अयोध्या के पुराने कार्यकर्ताओं के नाम चर्चा में हैं, जिन्हें कथित रूप से संगठन में उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है।इन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी में वर्षों से सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारियों से वंचित रखा जा रहा है,जबकि कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों को बार-बार अवसर दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति पार्टी के मूल सिद्धांतों और कैडर आधारित संरचना के विपरीत है। साथ ही, बाहर से आए या हाल ही में जुड़े कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना भी असंतोष का बड़ा कारण बन रहा है।संगठन में कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का कहना कि जबसे भाजपा के दो गैर भाजपा दलों के आयातित महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव व अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के हाथ कमान आई है कैडर के कार्यकर्ताओं को जान बुझकर हाशिए पर धकेला जा रहा है पूर्व में दूसरे दलों से भाजपा में शामिल हुए लोगों को उपकृत किया जा रहा है।कार्यकर्ताओं का सवाल है कि क्या पार्टी के संविधान में कहीं यह लिखा है कि एक ही व्यक्ति लंबे समय तक पद पर बना रहे और नए लोगों को अवसर न मिले? उनका मानना है कि इस तरह की कार्यशैली से न केवल समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है, बल्कि संगठन की जड़ों पर भी असर पड़ता है।
भाजपा के जनसंघी कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया सबसे दिलचस्प बात यह है कि 12 साल पहले बसपा और सपा में राजनीति कर भाजपा में आए महानगर अध्यक्ष और विधायक 35 साल से काम कर रहे पार्टी के कार्यकर्ताओं के कामों का अवलोकन कर रहे।रहा महानगर अध्यक्ष का सवाल तो 1980 के दशक के 10 कार्यकर्ताओं का नाम और उनके कार्यों की जानकारी न दे पाने वाले अध्यक्ष का पुराने कार्यकर्ताओं को पार्टी में महत्व देना उनके कामों का विश्लेषण ही भाजपा की विचारधारा के लिए सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह है।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और पार्टी नेतृत्व से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस पर ध्यान देकर संतुलित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिससे सभी कार्यकर्ताओं को समान अवसर मिल सके।

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