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सादुल्लानगर में ‘मौत की दुकानें’ सजाए बैठे अवैध पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर

रिपोर्ट – शिवम सोनी

बगैर पंजीकरण और विशेषज्ञ के हो रही जांचें, स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

सादुल्लानगर/बलरामपुर। जनपद के सादुल्लानगर क्षेत्र में चिकित्सा सेवा के नाम पर अवैध कारोबारियों ने अपना जाल फैला लिया है। यहाँ मानक विहीन पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की बाढ़ आ गई है, जहाँ न तो कोई योग्य टेक्निसियन है और न ही पंजीकरण का कोई वैध दस्तावेज। चिकित्सा क्षेत्र के नियमों को ठेंगा दिखाकर संचालित हो रहीं ये ‘मौत की दुकानें’ क्षेत्र की भोली-भाली जनता की जिंदगी और जेब, दोनों पर डाका डाल रही हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी पैथोलॉजी लैब में डिग्री धारक पैथोलॉजिस्ट और अल्ट्रासाउंड सेंटर पर रेडियोलॉजिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य है। लेकिन सादुल्लानगर कस्बे की गलियों में चल रहे इन सेंटरों पर नजारा कुछ और ही है। यहाँ इंटर पास युवक खून के नमूने ले रहे हैं और मनमाने ढंग से रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कई सेंटरों पर बड़े डॉक्टरों के नाम वाले लेटरहेड पहले से ही ‘डिजिटल सिग्नेचर’ के साथ छपे होते हैं, जिनमें केवल आंकड़ों की हेराफेरी कर मरीजों को थमा दिया जाता है। वही अल्ट्रासाउंड केंद्रों की स्थिति और भी भयावह है। पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के तहत प्रत्येक मशीन का पंजीकरण और उसे चलाने वाले विशेषज्ञ का ब्यौरा सार्वजनिक करना अनिवार्य है। किंतु यहाँ बिना किसी सूचना बोर्ड और बिना वैध कागजात के अल्ट्रासाउंड मशीनें धड़ल्ले से चल रही हैं। बगैर विशेषज्ञ के की जा रही इन जांचों में अक्सर गंभीर बीमारियाँ पकड़ में नहीं आतीं, या फिर गलत रिपोर्ट के कारण मरीज का गलत ऑपरेशन तक हो जाता है। बता दे की अधिकांश केंद्रों के पास सीएमओ कार्यालय का सक्रिय पंजीकरण नंबर तक नहीं है। उपयोग की गई सुइयों और संक्रमित कचरे को खुले में फेंका जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। जांचों के लिए कोई निर्धारित शुल्क नहीं है; मरीजों की आर्थिक स्थिति देखकर उनसे मनमानी वसूली की जाती है। रिपोर्ट पर ऐसे डॉक्टरों के नाम लिखे होते हैं, जो कभी उस केंद्र पर कदम तक नहीं रखते। वही स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण इन अवैध संचालकों के हौसले बुलंद हैं। आए दिन गलत रिपोर्ट के कारण मरीजों की हालत बिगड़ने के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण यह काला धंधा बंद नहीं हो रहा है। समाज सेवी संजय सिंह ने कहा की यह केवल अवैध व्यापार नहीं, बल्कि हत्या का प्रयास है। बिना डिग्री वाले लोग जब शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच करेंगे, तो परिणाम घातक ही होंगे। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इन अवैध संचालकों के खिलाफ ‘बुलडोजर’ जैसी कठोर कार्रवाई करता है या सादुल्लानगर की जनता यूं ही इन झोलाछाप जांच केंद्रों की शिकार होती रहेगी। जब इस सम्बन्ध में सीएमओ से जानकारी करने की कोशिश किया गया तो उनका मोबाइल नंबर कबरेज क्षेत्र से बाहर बताया।

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