आशा कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज, मान-सम्मान और हक़ की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
रिपोर्ट -ब्यूरो गोण्डा
बभनजोत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन
बभनजोत । गोंडा,स्वास्थ्य सेवाओं की नींव मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को बभनजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और अधीक्षक को आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन आशा कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसकी अगुवाई जिला उपाध्यक्ष श्रीमती अलका श्रीवास्तव ने की।इस अवसर पर सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने एक सुर में सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि उनके कार्य का उचित मूल्यांकन किया जाए, समय से मानदेय दिया जाए और कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ होती हैं। ये महिलाएं दूर-दराज़ के गांवों में जाकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल, नवजात शिशुओं का टीकाकरण, जननी सुरक्षा योजना, परिवार नियोजन, और स्वच्छता जागरूकता जैसे अहम कार्य करती हैं। धूप-बारिश, कच्चे रास्तों और संसाधनों की कमी के बावजूद इनका समर्पण अडिग रहती है।एक आशा बहन सुबह घर से निकलती है और गांव-गांव जाकर दर्जनों घरों में दस्तक देती है — सिर्फ सेवा भाव से, बिना किसी दिखावे के। उन्होंने ज्ञापन में विभिन्न मांगों की मांग की 1. आशाओं को कार्य के अनुसार समय पर मानदेय का भुगतान किया जाए।2. उपस्थिति दर्ज करने के तुरंत बाद भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए।3. स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों की बैठकें नियमित हों।4. प्रत्येक गांव में स्वास्थ्य संबंधी खुली बैठक आयोजित की जाए।5. उपकेंद्रों पर बैठने और रजिस्ट्रेशन की उचित व्यवस्था हो।6. त्रैमासिक समीक्षा बैठक में आशा संगिनी और यूनियन प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।7. कार्य मूल्यांकन की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवहारिक हो।8. लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान हेतु स्थायी संवाद व्यवस्था बनाई जाए।प्रदर्शन के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती विद्यावती मौर्या महामंत्री गुड़िया यादव सहित अनेक आशा बहनों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। ज्ञापन पर अंबोती देवी, सुमन गुप्ता, अरुणा देवी, उर्मिला आरती राधा लवली, सरोज बालिका मंडल संयोजक श्यामबरन पाण्डेय ने कहा कि “आशा कार्यकर्ता सिर्फ कर्मचारी नहीं, समाज की स्वास्थ्य रक्षक हैं। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, यूनियन चरणबद्ध रूप से आंदोलन जारी रखेगी।”
प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन आशा बहनों की आवाज़ में जो दर्द और समर्पण झलक रहा था, वह प्रशासन और समाज दोनों को सोचने पर मजबूर करता है।