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अग्निकाण्ड की घटनाओं को रोकने लिए जिला प्रशासन सतर्क, अग्निशमन विभाग के हेल्पलाइन नम्बर जारी

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

जिलाधिकारी ने अग्निकाण्ड की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने को लेकर बनाई रणनीति, जारी किए दिशा-निर्देश

बलरामपुर।जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने आगामी दिनों में संभावित अग्निकाण्ड की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं त्वरित आपात सहायता के दृष्टिगत अगिन शमन विभाग, आपदा प्रबंधन तथा स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य सम्बन्धित विभागों को अलर्ट कर दिया है।
जिलाधिकारी जैन ने बताया कि अग्नि शमन विभाग के हेल्पलाइन नम्बर जारी कर दिए है तथा जनमानस से अपील किया है कि आग लगने पर कोई भी व्यक्ति तत्काल मदद के लिए उ०प्र० अग्निशमन सेवा के टेलीफोन नम्बर-101 एवं पुलिस सहायता हेतु टेलीफोन नम्बर-112 डायल करें। अग्निशमन विभाग बलरामपुर के आपातकालीन नम्बरों क्रमशः तहसील बलरामपुर के लिए 9454418820, तुलसीपुर 9454418821 व तहसील उतरौला के लिए 7839861626 डाॅयल करें। इसी प्रकार प्रभारी अग्निशमन अधिकारी बलरामपुर के मोबाइल नम्बर 9454418819 पर तत्काल सूचना दें और मदद प्राप्त करें। इसके अलावा कलेक्ट्रेट स्थित आपदा कन्ट्रोल रूम के नम्बर 9170277336 पर भी काॅल करके मदद प्रापत कर सकते हैं।अग्नि काण्ड से बचाव को लेकर जनमानस एवं किसान बरतें निम्न सावधानियां-जिलाधिकारी।
जिलाधिकारी जैन ने किसानों भाइयों से अपील किया है कि गेहूँ की फसल की कटाई के पश्चात् खेतों में बचे हुये उन्ठल (गेहूँ का अवशेष) में आग न लगाये बल्कि बचे हुये अवशेष मौसम के अनुकुल ट्रैक्टर से जुताई करके नष्ट करें। चूल्हें के ईंधन की चिंगारियों व गरम राख को पूर्ण रूप से ठंडा करके फेंकें, रसोई घर की छत टीन से बनाइये, अगर फूस की बनाये तो उसके अन्दर की ओर मिट्टी का लेप लगाइये। जलते हुए बचे बीड़ी के टुकड़े को पैर से कुचलकर तथा पूर्णरूप से बुझकर फेकिए। हुक्का पीने के पश्चात् चिलम की आग को पूर्णरूप से बुझाकर छोड़िये। लैम्प व पेट्रोमैक्स सुरक्षित स्थान पर रखिए या टांगिए।चिराग को प्रयोग करने के पश्चात् पूर्ण रूप से बुझा दीजिये। खलिहान, तालाब के निकट या अन्य पानी के साधनों के निकट स्थापित कीजिए। पुआल व कण्डों के ढेर को पूर्ण रूप से सूख जाने पर निवात्त-स्थान से कम से कम 100 फुट की दूरी पर लगाइए। खलिहान के चारों ओर पानी के भरे घड़े व मिट्टी के ढेर उपलब्ध रखिये। खलिहान से कम से कम 100 फुट की दूरी पर खाना बनाइये या धूम्रपान कीजिए। खलिहान, व मकान, रेलवे लाइन से कम से कम 100 फुट की दूरी पर बनाइए। त्योहार पर आतिशबाजी का प्रयोग निवास स्थानों व खलिहानों से लगभग 500 फुट की दूरी पर कीजिए। घी व तेल की आग को बालू व मिट्टी से ढककर बुझाना चाहिए।गांव में अग्नि दुर्घटना के रोकथाम हेतु टोलियों का करें गठन-डीएम।गांव में अग्नि दुर्घटना के रोकथाम हेतु टोलियों अग्निशमन टोली, विध्वंसकारी टोली, प्रहरी टोली व जीवनरक्षक टोलियां बनाना बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि इन टोलियों को अग्निशमन केन्दो पर प्रशिक्षण भी दिलाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि ग्राम सभा या ग्राम पंचायत घरों में अग्निशमन के यन्त्रों जैसे स्ट्रप पम्प 4 अदद, बाल्टी 24 अदद, बेलचा 4 अदद, बड़ी कुल्हाड़ी 2 अदद, कुदाल 2 अदद, सीढ़ी 15 फुट 2 अदद, पेट्रोमैक्स 4 अदद, टाचबत्ती 4 अदद, एलार्म (घण्टा) 1 अदद आदि उपलब्ध रहना चाहिए तथा गांव के तालाब व पानी के निकट तक फायर ब्रिगेड की मशीनों व यंत्रों के पहुँचने का साधन बराबर बनाये रखिये व ग्राम में फायर ब्रिगेड के मशीनों के सुचारू रूप व शीघ्र ग्राम तक पहुँचने के वास्ते सड़क ठीक बनाये रखिये।फायर ब्रिगेड को ग्रामीण क्षेत्र की आगों पर बुलाते समय सही एवं सटीक सूचनाएं जैसे घटनास्थल का सही पता, पानी का साधन, घटना स्थल से पानी की दूरी आदि की सही जानकारी दें ताकि गाड़ियों के भेजने में देरी न हो।आग से बचाव के लिए क्या नहीं करना चाहिए।जिलाधिकारी ने सुरक्षात्मक उपायों को बताया कि आग से बचाव के लिए बिस्तर में लेट कर धूम्रपान न कीजिए, हुक्का पीने के पश्चात् चिलम की आग को जलता मत छोड़िए, खलिहान में बीड़ी, सिगरेट व हुक्का मत पीजिए, बीड़ी सिगरेट के टुकड़े को सुलगती हालत में मत फेंकिये, खलिहान के निकट खाना मत बनाइये, खलिहान, मकान व रेलवे लाइन के निकट मत बनाइये, नंगे चिराग व कुंथियों को जलता गत छोड़िए,चूल्हे की चिंगारी व गरम राख कूड़े के ढेर पर मत फेकिए, रसोई घर का छाजन फुस के छप्पर से मत बनाइये दियारालाई अबोध बालकों की पहुँच वाले स्थानों पर मत रखिये, त्यौहारों पर आतिशबाजी का प्रयोग ग्राम के निवास स्थानों व खलिहानों के निकट मत करिए, लैम्प व पेट्रोमैक्स छप्परों में मत टांगियें तथा घी व तेल की आग पर पानी नहीं डालना चाहिए।

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