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साइबर ठगी करने वाले सक्रिय गैंग का भंडाफोड, 02 शातिर साइबर आरोपी गिरफ्तार

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एन्ड्राइड मोबाइल व कूटरचित दस्तावेज बरामद

बलरामपुर।पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार द्वारा जनपद बलरामपुर में साइबर अपराध से सम्बन्धित हॉटस्पॉट के विरुध्द कार्यवाही किये जाने हेतु दिये गये सख्त निर्देश के क्रम में थानाध्यक्ष सत्येन्द्र वर्मा थाना सादुल्लानगर जनपद बलरामपुर के नेतृत्व में मु0अ0सं0 017/2026 धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338 बीएनएस व धारा 66 डी आईटी एक्ट के बावत अभियुक्तगण द्वारा संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करने, लोगो को Logistics/ ट्रांसपोटेशन/ माल ढुलाई (गुड्स कैरियर) के नाम पर फर्जी पहचान के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतकर साइबर ठगी कर विभिन्न बैंको में अलग – अलग बैंक खाते खुलवाकर उसमें साइबर ठगी की धनराशि मंगवाते थे तथा ठगी की धनराशि को चेक व ए0टी0एम0 के माध्यम से निकालकर दूसरे बैंक खातों में जमा कर सेटलमेन्ट करते थे जिससे बैंक खाता में ठगी की धनराशि को होल्ड न हो सके। अभियोग से सम्बन्धि 02 अभियुक्त देवा तिवारी पुत्र अनूप कुमार तिवारी निवासी भगवड़ा देवरिया इनायत थाना सादुल्लानगर जनपद बलरामपुर व दीपक कुमार शुक्ला पुत्र स्व0 श्याम मूरत शुक्ला मधुपुर मनकापुर थाना मनकापुर जनपद गोण्डा को संकटा चौराहा सादुल्लानगर के पास से गिरफ्तार कर विधिक कार्यवाही कर न्यायालय भेजा जा रहा है।देवा तिवारी पुत्र अनूप कुमार तिवारी निवासी भगवड़ा देवरिया इनायत थाना सादुल्लानगर जनपद बलरामपुर,दीपक कुमार शुक्ला पुत्र स्व0 श्याम मूरत शुक्ला मधुपुर मनकापुर थाना मनकापुर जनपद गोण्डा।अभियुक्तगण संगठित तरीके से साइबर ठगी करने वाले एक संचालित नेटवर्क के सक्रिय सदस्य हैं, जिसमें ये लोग ग्राहकों/ जरुरतमंदो से माल Logistics/ ट्रांसपोटेशन/ ढुलाई (गुड्स कैरियर) के नाम पर कम दरों में आकर्षित कर उनसे एडवांस के रूप में धनराशि ली जाती थी तथा लोगो का विश्वास जीतने के लिए विभिन्न फर्जी पहचान का प्रयोग किया जाता था। एडवान्स के रुप में ली जाने वाली धनराशि गिरोह के सदस्यों द्वारा खुलवाये गये विभिन्न बैंक खातों में मगवायी जाती थी तथा पैसा खाते में आते ही उसे तुरंत चेक/एटीएम के माध्यम से निकालकर गिरोह के मास्टरमाइंड द्वारा उपलब्ध कराये गये अन्य बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता था, जिससे धनराशि भेजने वाले को साइबर ठगी का एहसास होने पर जब वह साइबर फ्राड की शिकायत करे तो धनराशि होल्ड न हो जाये। बैंक खाता होल्ड होने पर अभियुक्तगणों द्वारा बैंक खाते से सम्बन्धित सिम निकाल कर फेक दिया जाता था तथा अन्य नये बैंक खाता व सिम का प्रबन्ध साइबर फ्राड की धनराशि के सेटलमेन्ट हेतु किया जाता था। उक्त दोनो अभियुक्तो पर हरियाणा में अभियोग पंजीकृत है तथा दीपक कुमार शुक्ला साइबर फ्राड के प्रकरण में पूर्व में हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल जा चुका है। अभियुक्त दीपक कुमार शुक्ला पूर्व में कोलकाता में रह रहा था वहीं से साइबर अपराध करने वाले गिरोह के संपर्क में आया तथा वही से अपना साइबर अपराध कार्य प्रारम्भ कर दिया तथा अपने ग्रुप में देवा तिवारी को सक्रिय सदस्य के रुप में शामिल कर लिया। अभियुक्तगण के पास से बरामद मोबाइल व अन्य साक्ष्य संकलन से अभी तक कुल 10 बैंक खाते प्राप्त हुये हैं जिनपर विभिन्न राज्यों में कुल 11 साइबर से सम्बन्धित शिकायते दर्ज हैं। प्राप्त बैंक खातों में एक बैंक खाते का विवरण प्राप्त किया गया है जिसमें अभियुक्तगणों द्वारा लगभग 16 लाख रुपये का लेनदेन किया गया है शेष बैंक खातो का विवरण प्राप्त होना शेष है।ठगी का शिकार होने पर अपने नजदीकी थाने की साइबर सेल पर तत्काल संपर्क करें अथवा भारत सरकार द्वारा जारी नंबर 1930 पर कॉल करें। किसी भी प्रकार के साइबर क्राइम से सम्बन्धित आनलाइन शिकायत भारत सरकार द्वारा जारी अनलाइन नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in के माध्यम से करें।

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