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“बहू–बेटी सम्मेलन” पर एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का हुआ आयोजन

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

बलरामपुर।महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध एवं लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के उद्देश्य से गोरखपुर जोन में संचालित “बहू–बेटी सम्मेलन” पहल के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिनांक 29 अप्रैल 2026 को बलरामपुर में एक एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई । कार्यशाला का आयोजन अपरान्ह 12:00 बजे से सायं 4:30 बजे तक पुलिस लाइन सभागार, बलरामपुर में किया गया । इस कार्यक्रम का संचालन विशाल पाण्डेय अपर पुलिस अधीक्षक, बलरामपुर द्वारा किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विपिन कुमार जैन,जिलाधिकारी बलरामपुर सहित विकास कुमार, पुलिस अधीक्षक, बलरामपुर, यशपाल वर्मा , सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलरामपुर तथा प्रशिक्षु आईएएस शिवांश विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनपद बलरामपुर के समस्त पुलिस सर्किलों से पुलिस उपाधीक्षक, सभी पुलिस थानों से मिशन शक्ति केंद्र प्रभारी एवं प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र से दो महिला पुलिस कार्मिकों सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी, समस्त खण्ड विकास अधिकारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि तथा पीजीएसएस की टीम ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।कार्यशाला का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके उपरांत सभी अतिथियों एवं रिसोर्स पर्सन्स का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। स्वागत सत्र के बाद रिसोर्स पर्सन्स का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात यूनिसेफ के मंडलीय बाल संरक्षण सलाहकार शैलेश प्रताप सिंह द्वारा कार्यशाला के उद्देश्य एवं उसकी रूपरेखा पर विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया गया।कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने पुलिस अधीक्षक बलरामपुर की सराहना करते हुए कहा कि जनपद में कम्युनिटी पुलिसिंग के क्षेत्र में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि जेंडर समानता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है तथा व्यवहार परिवर्तन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि पुलिस विभाग के साथ-साथ जनपद के अन्य संबंधित विभाग समन्वित एवं सहयोगात्मक रूप से कार्य करें, तो निश्चित रूप से “बहू-बेटी सम्मेलन” का प्रभाव उन क्षेत्रों तक पहुँचेगा जहाँ इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है।उन्होंने यह भी कहा कि महिला संबंधी शिकायतों के मामलों में प्रभावी बदलाव लाने के लिए यह आवश्यक है कि हम पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्यवाही न करें, बल्कि पहले पीड़ित की बात ध्यानपूर्वक सुनें और प्राप्त तथ्यों के आधार पर संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही करें। जिलाधिकारी ने आगे कहा कि यदि सभी विभाग मिलकर “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में कार्य करें, तो बहू-बेटी सम्मेलन के माध्यम से अपेक्षित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित “सास-बहू सम्मेलन”, जिसमें प्रजनन स्वास्थ्य के विषय में जागरूकता दी जाती है, के साथ बहू-बेटी सम्मेलन को भी समन्वित रूप से आयोजित किया जा सकता है। इसे VHSND सत्रों के साथ जोड़ने के लिए माइक्रो प्लान बनाते समय इस पहलू का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इससे यह लाभ होगा कि जनपद की लगभग 800 ग्राम पंचायतों का विभिन्न विभागों द्वारा प्रभावी रूप से पर्यवेक्षण किया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहल की सफलता के लिए सभी विभागों का सहयोग एवं समन्वय अनिवार्य है, जिससे जनपद में लिंग आधारित हिंसा के मामलों में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित किया जा सके।कार्यशाला को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने कहा कि “बहू-बेटी सम्मेलन” एक अनूठी पहल है, जिसकी शुरुआत अपर पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन मुथा अशोक जैन द्वारा की गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस का प्रथम दायित्व अपराध की रोकथाम एवं अन्वेषण होता है, जिसमें उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी स्थान पर है तथा जनपद बलरामपुर में भी विभिन्न प्रकार के अपराधों का सफल अन्वेषण किया जा रहा है। हालांकि, अपराधों की प्रभावी रोकथाम अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि “बहू-बेटी सम्मेलन” महिला संबंधी अपराधों में कमी लाने का एक सशक्त माध्यम है। उदाहरण स्वरूप, दहेज मृत्यु के मामलों में पुलिस अपराध घटित होने के बाद प्रभावी कार्यवाही करने में सक्षम होती है, किन्तु ऐसे अपराधों को पहले से रोक पाना कठिन होता है, क्योंकि ये प्रायः परिवार के भीतर घटित होते हैं और बिना शिकायत के हस्तक्षेप करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों के समन्वय से महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित अपराधों की पूर्व रोकथाम संभव हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सम्मेलन के दौरान यदि कोई महिला, बालिका या उनका परिवार पुलिस से इतर किसी अन्य विभाग से संबंधित समस्या भी साझा करता है, तो पुलिस विभाग उसे अनदेखा नहीं करेगा। संबंधित व्यक्ति की बात ध्यानपूर्वक सुनी जाएगी और जिस विभाग से मामला जुड़ा होगा, उसे लिखित रूप से अवगत कराते हुए आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, उस प्रकरण में प्रभावी कार्यवाही होने तक पुलिस द्वारा अनिवार्य रूप से फॉलो-अप किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की संवेदनशील एवं समन्वित कार्यप्रणाली से आमजन का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा, लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आगे आएंगे और इस पहल के माध्यम से जनपद बलरामपुर में सकारात्मक एवं प्रभावी परिवर्तन देखने को मिलेगा।कार्यशाला को संबोधित करते सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यशपाल वर्मा ने कहा कि अगर बहू को भी बेटी समझा जाए तो आधी समस्याएं अपने आप ही समाप्त हो जाएँगी । कुछ काम ऐसे होते हैं जो हम शुरू करते हैं और समय बीतने के साथ वे परम्पराएँ बन जाती हैं और वे परम्पराएँ समय के साथ रुढ़िवादी सोच बन जाती हैं । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे मामले जिसमें मध्यस्ता की जा सकती है, उसमें मध्यस्ता के माध्यम से सकारात्मक बदलाव के लिए काम करता है । जनपद बलरामपुर में विगत 3 महीने में 200 से अधिक पारिवारिक विवादों में मध्यस्ता कराई है, जिससे न्यायायलय का भार कम हुआ है । उन्होंने यह आश्वाशन दिया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत कार्यरत पी0एल0वी0 इस पहल में पूरा सहयोग प्रदान करेंगे।कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉo मुकेश रस्तोगी, मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा स्वास्थ्य विभाग में सास-बहू-बेटा सम्मेलन आयोजित करने का आश्वत किया गया और बहू-बेटी सम्मेलन प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार आयोजित कर कार्यक्रम के माध्यम निश्चित रूप समाज को जागरुक किया जा सकता है।सुश्री पल्लवी राय, राज्य सलाहकार, यूनिसेफ ने “आँकड़े क्या बताते हैं”।विषय पर चर्चा करते हुए आयु, जाति, वर्ग, शिक्षा आदि जनसांख्यिकीय संकेतकों के आधार पर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की प्रवृत्तियों एवं उसके संभावित कारणों पर प्रकाश डाला ।शैलेश प्रताप सिंह, मण्डलीय बाल संरक्षण सलाहकार, यूनिसेफ ने अपने सत्र में बहू-बेटी सम्मेलन की उत्पत्ति, अवधारणा, उद्देश्य तथा “क्यों, क्या, कैसे और कौन” के आयामों पर चर्चा की। उन्होंने इसकी कार्यप्रणाली, सामुदायिक मॉडल, लिंग आधारित हिंसा पर चर्चा समूह, डेटा आधारित हस्तक्षेप, मिशन शक्ति केंद्र की भूमिका, विभागीय कन्वर्जेन्स, माइक्रो प्लान, क्षमता निर्माण, प्रभावी पर्यवेक्षण, जेंडर-रेस्पॉन्सिव पुलिसिंग तथा जवाबदेही जैसे प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला। सुश्री सुखपाल कौर, जेंडर विशेषज्ञ ने जेंडर के सामाजिक निर्माण, पितृसत्ता, जेंडर आधारित हिंसा, विक्टिम ब्लेमिंग, इंटरसेक्शनैलिटी तथा पुरुषों और लड़कों की जिम्मेदारी जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा की। सुश्री अंचल गुप्ता, विधि विशेषज्ञ, ने महिला एवं बाल संरक्षण संबंधी प्रमुख कानूनों, यौन अपराधों में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों तथा न्यायालयों के प्रमुख निर्णयों पर चर्चा की।पल्लवी राय, राज्य सलाहकार, यूनिसेफ ने मिशन शक्ति केंद्र की प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने NGOs, चिकित्सा विशेषज्ञों, काउंसलर्स तथा मीडिया के साथ प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए सकारात्मक कहानियों के प्रसार के महत्व को रेखांकित किया।

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