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बलरामपुर में जिला सहकारी बैंक शीघ्र होगा स्थापित, किसानों को मिलेगा कम ब्याज पर फसली ऋण – सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

सहकारिता क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती, जिला सहकारी बैंक, डिजिटल समितियां और पारदर्शी उर्वरक वितरण पर मंत्री ने दिए निर्देश

बलरामपुर।जनपद में सहकारिता क्षेत्र को नई गति देने, किसानों को बेहतर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने, उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने तथा सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), सहकारिता जे.पी.एस. राठौर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में मंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को सशक्त बनाने और सहकारिता व्यवस्था को आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में जिला सहकारी बैंक बलरामपुर की स्थापना की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है, जिसके लिए आवश्यक कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि बैंक की स्थापना के लिए नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज (NABCONS) द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है तथा बैंकिंग लाइसेंस हेतु भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। मंत्री ने बताया कि जिला सहकारी बैंक बलरामपुर स्थापित होने पर यह प्रदेश का 51वां जिला सहकारी बैंक होगा, जिसके कार्यक्षेत्र में बलरामपुर एवं गोंडा दोनों जिले शामिल होंगे।वर्तमान में ये दोनों जिले किसी भी जिला सहकारी बैंक के कार्यक्षेत्र में नहीं आते हैं। बैंक की स्थापना से दोनों जनपदों के लाखों कृषकों को सीधा लाभ मिलेगा।उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसानों को अन्य बैंकों से चार प्रतिशत ब्याज दर पर फसली ऋण प्राप्त करना पड़ता है, जबकि जिला सहकारी बैंक की स्थापना के बाद किसान किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से तीन प्रतिशत ब्याज दर पर फसली ऋण प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों की लागत में कमी आएगी तथा कृषि गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि बैंक की स्थापना के लिए लगभग 14.90 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।बैठक में माननीय मंत्री ने सहकारिता समितियों को और अधिक आधुनिक एवं सक्षम बनाए जाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रदेश की सभी सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं गति आएगी। उन्होंने बताया कि समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 10 लाख रुपये तक की शून्य ब्याज (जीरो इंटरेस्ट) क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे समितियां अपनी गतिविधियों का विस्तार कर सकेंगी तथा किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।बैठक में उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक कृषक को निर्धारित मूल्य पर समयबद्ध, सरल एवं सुलभ तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूर्णतः पारदर्शी रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर कृत्रिम अभाव, कालाबाजारी अथवा अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।बैठक के उपरांत मंत्री जी ने बहुउद्देशीय सहकारी समिति (बी-पैक्स) सेखुईकला तथा क्रय-विक्रय समिति भगवतीगंज का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने समितियों की व्यवस्थाओं, अभिलेखों, किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं तथा उर्वरक वितरण प्रणाली का अवलोकन किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए उन्हें और अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाया जाए।बैठक में विधायक बलरामपुर सदर पल्टूराम, विधायक उतरौला राम प्रताप वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री आरती तिवारी, जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन, जनप्रतिनिधि प्रदीप सिंह, सहकारिता विभाग के प्रबंध निदेशक सहित विभागीय अधिकारी एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों को बेहतर बैंकिंग एवं ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पारदर्शी उर्वरक वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।

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