बलरामपुर में अल्ट्रासाउंड जांच का खेल? मरीजों की जेब या स्वास्थ विभाग की ज़िम्मेदारी!
बलरामपुर में अल्ट्रासाउंड जांच का खेल? मरीजों की जेब या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी!
बलरामपुर। जनपद में अल्ट्रासाउंड और डायग्नॉस्टिक सेंटरों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच और कार्रवाई की व्यवस्था इतनी कमजोर हो गई है कि जगह-जगह सेंटर खुलते जा रहे हैं और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ का खतरा बढ़ रहा है।सेंटर संचालकों की कथित दलील और भी चौंकाने वाली है। उनका कहना है कि यदि योग्य रेडियोलॉजिस्ट को नियुक्त कर सेंटर चलाया जाए तो जांच की फीस करीब 800 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये तक करनी पड़ेगी, क्योंकि रेडियोलॉजिस्ट की मांग 8 से 10 लाख रुपये या उससे अधिक बताई जाती है। इसी आर्थिक बोझ से बचने के लिए कथित तौर पर कुछ सेंटरों में अप्रशिक्षित या गैर-योग्य लोगों से जांच कराने का रास्ता अपनाया जा रहा है।सवाल सीधा है—क्या मरीज की जान और स्वास्थ्य की कीमत कुछ सौ रुपये की बचत से लगाई जा सकती है?अगर बिना निर्धारित योग्यता वाले व्यक्ति अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जांच कर रहे हैं तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता और मरीज की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग से है—क्या विभाग को इन सेंटरों की वास्तविक जांच की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद हैं?अब जरूरत सिर्फ कागजी जांच की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर निष्पक्ष और सख्त जांच की है, ताकि मरीज इलाज कराने जाएं, जोखिम उठाने नहीं।