यूरिया के लिए जान जोखिम में डाल रहे किसान, 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर बायोमेट्रिक कराने का आरोप
बलरामपुर। धान की फसल में टॉप ड्रेसिंग के अहम समय पर विकासखंड हरैया सतघरवा की कोहड़ौरा साधन सहकारी समिति किसानों की परेशानी का कारण बन गई है। यूरिया की किल्लत के बीच किसानों ने वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यूरिया लेने के लिए उन्हें करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठा) कराना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।किसानों के अनुसार बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के यूरिया नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में बुजुर्ग और शारीरिक रूप से कमजोर किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि जो लोग टंकी पर चढ़ने में असमर्थ हैं, उन्हें यूरिया से वंचित कर दिया जा रहा है, जिससे धान की फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा निर्धारित ₹266.50 प्रति बोरी की दर के स्थान पर समिति पर ₹280 प्रति बोरी वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई किसानों को 10 जुलाई को यूरिया उपलब्ध होने का संदेश मिला था, लेकिन 29 जुलाई तक भी उन्हें खाद नहीं मिल सकी। इससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।किसानों का कहना है कि खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय पर खाद के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यदि जल्द ही पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया तो धान की फसल की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।किसानों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सुरक्षित स्थान पर बायोमेट्रिक की व्यवस्था सुनिश्चित करने, निर्धारित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध कराने तथा शिकायत सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
