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इमलिया कोडर के थारू जनजाति संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय पहचान

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

बलरामपुर। जनपद की समृद्ध थारू जनजातीय संस्कृति और समुदाय आधारित पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। इमलिया कोडर स्थित ‘थारू जनजाति संग्रहालय एवं सजीव धरोहर परिदृश्य’ का चयन प्रतिष्ठित ICRT Indian Subcontinent Responsible Tourism Awards 2026 के फाइनलिस्ट के रूप में किया गया है। इस उपलब्धि से बलरामपुर के पर्यटन क्षेत्र में खुशी का माहौल है।इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म (ICRT) की ओर से घोषित पुरस्कार के फाइनलिस्ट में भारत, नेपाल और श्रीलंका की कुल 22 उत्कृष्ट पर्यटन पहलों को शामिल किया गया है। इनका चयन उत्तरदायी पर्यटन, नवाचार, स्थानीय समुदाय पर प्रभाव, अन्य स्थानों पर अपनाए जा सकने वाले मॉडल तथा सतत पर्यटन के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर किया गया है।इमलिया कोडर का थारू जनजाति संग्रहालय केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि थारू समुदाय की जीवंत संस्कृति, परंपराओं, लोककला, पारंपरिक ज्ञान, रहन-सहन और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली को करीब से समझने का केंद्र बन रहा है। यहां पर्यटन विकास के साथ स्थानीय संस्कृति की मौलिकता और पहचान को संरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है।उत्तरदायी पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने, जनजातीय कला एवं हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। यही पहल अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची है।ICRT पुरस्कार समारोह 4 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, द्वारका में आयोजित होगा। समारोह में फाइनलिस्ट पहलों को ‘Gold’, ‘Silver’ अथवा ‘One to Watch’ सम्मान प्रदान किया जाएगा।इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से थारू संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने के साथ बलरामपुर को उत्तरदायी एवं सतत पर्यटन के महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में स्थापित करने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

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