राम वन गमन और केवट संवाद के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों की आंखें की नम
रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर
बलरामपुर। नगर के रामलीला मैदान में श्री श्री 108 सत्य प्रचारिणी रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में गुरुवार की रात दशरथ प्रतिज्ञा, राम वन गमन और केवट संवाद का भावपूर्ण मंचन किया गया। राधेश्याम रामायण पर आधारित मार्मिक संवादों और कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। राम वन गमन के प्रसंग में जहां अयोध्या में शोक का वातावरण छा गया, वहीं केवट संवाद ने श्रद्धालुओं को भक्ति और समर्पण की भावना से सराबोर कर दिया।मंचन की शुरुआत दशरथ प्रतिज्ञा के प्रसंग से हुई। कैकेयी के वरदान मांगने और महाराज दशरथ के वचनबद्ध होने के घटनाक्रम ने कथा को भावनात्मक मोड़ दिया। पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए भगवान श्रीराम ने सहर्ष 14 वर्ष का वनवास स्वीकार कर लिया। श्रीराम के वन जाने की सूचना से अयोध्या में शोक छा गया। महाराज दशरथ की व्याकुलता और कैकेयी के निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियों का कलाकारों ने प्रभावशाली चित्रण किया।मंचन के माध्यम से दिखाया गया जब श्रीराम ने पिता की आज्ञा को सर्वोपरि बताते हुए राजमहल छोड़ने का निर्णय सुनाया तो रामलीला मैदान में मौजूद दर्शक भावुक हो उठे। माता सीता ने भी पति के साथ वन जाने का संकल्प व्यक्त किया, जबकि लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का परिचय दिया। वन गमन के दृश्य में कलाकारों के मार्मिक अभिनय ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।इसके बाद केवट संवाद का मंचन हुआ। वन जाते समय भगवान श्रीराम के गंगा तट पर पहुंचने और केवट से नदी पार कराने का आग्रह करने का प्रसंग श्रद्धा के साथ प्रस्तुत किया गया। केवट ने प्रभु के चरण पखारने की इच्छा व्यक्त की। भावपूर्ण संवादों के बीच केवट की भक्ति, विनम्रता और प्रभु के प्रति अगाध प्रेम का सुंदर चित्रण किया गया। इस दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि रामकथा के प्रत्येक प्रसंग में जीवन के लिए महत्वपूर्ण संदेश निहित हैं। राम वन गमन त्याग, मर्यादा और माता-पिता की आज्ञा के पालन की प्रेरणा देता है, जबकि केवट संवाद सच्ची भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश देता है। मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। देर रात तक दर्शक रामलीला का आनंद लेते रहे।