कुआनो रेंज के पास रिंग रोड निर्माण में पेड़ों की कटान पर उठे सवाल, बिना नीलामी लकड़ी बेचने का आरोप
रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर
वन विभाग और लोक निर्माण विभाग की भूमिका पर सवाल, वायरल वीडियो के आधार पर जांच और कार्रवाई की मांग
बलरामपुर। कुआनो रेंज से महज 200 मीटर की दूरी पर रिंग रोड निर्माण कार्य के दौरान पेड़ों की कटान को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य की जद में आए पेड़ों को ठेकेदार राजू तिवारी द्वारा कथित तौर पर बिना आवश्यक परमिट और अनुमति के कटवाकर लकड़ी बाहर भेजी जा रही है। इस संबंध में लकड़ी की कटान और ढुलाई का एक वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है।
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि रिंग रोड निर्माण क्षेत्र में आने वाले पेड़ों का वन विभाग द्वारा मूल्यांकन किए जाने के बाद उनकी कटान, निस्तारण और लकड़ी की बिक्री किस प्रक्रिया के तहत की गई? आरोप है कि पेड़ों का मूल्य निर्धारण होने के बावजूद लोक निर्माण विभाग ने लकड़ी को अपने कब्जे में लेकर नियमानुसार नीलामी की प्रक्रिया नहीं अपनाई। इसके बजाय कथित तौर पर ठेकेदारों के स्तर पर ही लकड़ी का सौदा कर लिया गया। यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का विषय है कि लकड़ी की बिक्री से प्राप्त धनराशि किस खाते में जमा कराई गई और सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
हैरानी की बात यह भी है कि घटनास्थल के आसपास वन विभाग का कार्यालय और जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक के आवास होने की बात बताई जा रही है। इसके बावजूद यदि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान और लकड़ी की ढुलाई बिना वैध अनुमति के हुई है, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जांच के घेरे में कौन-कौन से सवाल?
पेड़ों की कटान के लिए अनुमति किस अधिकारी ने दी? वन विभाग ने कितने पेड़ों का मूल्यांकन किया और उनकी कीमत कितनी निर्धारित की गई? क्या लोक निर्माण विभाग ने पेड़ों और लकड़ी को विधिवत अपने कब्जे में लिया था? यदि नीलामी नहीं हुई तो लकड़ी किस आधार पर बेची गई और बिक्री की रकम कहां जमा हुई? क्या मौके से लकड़ी बाहर ले जाने के लिए वैध परिवहन प्रपत्र जारी किए गए थे |