इटईरामपुर ग्राम पंचायत में बड़ा वित्तीय घोटाला? निरस्त जीएसटी फर्म के नाम पर ₹90,485 का भुगतान, उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर
बलरामपुर। विकास खंड गैण्डास बुजुर्ग की ग्राम पंचायत ईटईरामपुर में सरकारी धन के भुगतान को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2024 में निरस्त (Cancelled) हो चुकी एक जीएसटी फर्म के नाम पर ₹90,485 का भुगतान कर दिया गया। इस प्रकरण ने ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। निरस्त जीएसटी नंबर पर हुआ भुगतान।प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत के अभिलेखों में “हीरा ब्रिक फील्ड, कुसमौरा घाट” के नाम से बिल लगाकर ₹90,485 का भुगतान दर्शाया गया है। जबकि संबंधित फर्म की जीएसटी वर्ष 2024 में ही निरस्त (सरेंडर) की जा चुकी थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब जीएसटी पंजीकरण पहले ही समाप्त हो चुका था, तो उसी फर्म के नाम पर सरकारी धन का भुगतान किस आधार पर किया गया? *भट्ठा संचालक का बड़ा खुलासा*।मामले की सच्चाई जानने के लिए जब मीडिया ने संबंधित भट्ठा संचालक से बातचीत की, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया। संचालक ने बताया कि “हीरा ब्रिक फील्ड, कुसमौरा घाट” नामक भट्ठा करीब दो-तीन वर्ष पहले ही बंद किया जा चुका है तथा उसकी जीएसटी भी वर्ष 2024 में सरेंडर कर दी गई थी।उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा कि जिस बैंक खाते के अंतिम चार अंक 9135 बताए जा रहे हैं, वह उनका खाता ही नहीं है। यदि यह दावा सही है, तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता ही नहीं बल्कि फर्जी भुगतान और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की ओर भी संकेत करता है।
सचिव से जवाब मांगने पर टालमटोल।
जब इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत सचिव से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने पत्रकार के सवालों का उत्तर देने के बजाय पहले उनका आईडी कार्ड दिखाने को कहा। पत्रकार द्वारा अपनी पहचान और आईडी प्रस्तुत करने के बाद भी सचिव ने किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया और “मीटिंग में जाना है” कहकर वहां से चले गए।सचिव द्वारा आरोपों पर स्पष्ट जवाब न देना पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना रहा है।
प्रशासनिक जांच की मांग। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निरस्त जीएसटी फर्म के नाम पर वास्तव में सरकारी भुगतान हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि भुगतान किसके खाते में गया, किसके आदेश पर हुआ और सरकारी धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।गंभीर सवाल:- वर्ष 2024 में निरस्त जीएसटी फर्म के नाम पर भुगतान कैसे हुआ?- भुगतान किस बैंक खाते में किया गया और वह खाता किसका है?- बंद हो चुके भट्ठे के नाम से बिल किसने तैयार किए? भुगतान से पहले दस्तावेजों और जीएसटी की वैधता की जांच क्यों नहीं की गई?इस पूरे प्रकरण में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही? बयान। जब इस सम्बन्ध में बीडीओ गैंडास बुजुर्ग से जानकारी किया गया तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जायेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।