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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न

रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सेवानिवृत्त शिक्षकों की अल्पकालिक नियुक्ति हेतु शासन को पत्र भेजने के निर्देश, प्रत्येक विद्यालय की समय-सारिणी में स्मार्ट क्लास को किया जाए शामिल

बलरामपुर।जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की जिला शिक्षा अनुश्रवण समिति की अक्टूबर माह की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN), शिक्षण-अधिगम गतिविधियों, विद्यालयों के नियमित अनुश्रवण, अवस्थापना सुविधाओं, स्मार्ट क्लास, शिक्षकों की उपलब्धता एवं बोर्ड परीक्षा की तैयारियों सहित विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि जनपद के विभिन्न विकास खंडों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए गए हैं। विशेष रूप से आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN), गतिविधि आधारित शिक्षण, कमजोर बच्चों की पहचान, उपचारात्मक शिक्षण, शिक्षण-अधिगम सामग्री के उपयोग तथा विद्यालय नेतृत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।समीक्षा के दौरान बताया गया कि अक्टूबर माह में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) द्वारा कुल 380 विद्यालयों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता, बच्चों की सीखने की क्षमता, शिक्षकों द्वारा अपनाई जा रही शिक्षण पद्धतियों एवं विद्यालयों की शैक्षिक गतिविधियों का आकलन किया गया।FLN के अंतर्गत कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों में अक्षर एवं शब्द पढ़ने, सरल अनुच्छेद पढ़ने तथा सामान्य जोड़-घटाव करने की क्षमता में विभिन्न विकास खंडों में सुधार दर्ज किया गया है। विशेष रूप से सरल अनुच्छेद पढ़ने की क्षमता में सभी नौ विकास खंडों में सकारात्मक प्रगति सामने आई है।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि बच्चों की वास्तविक अधिगम उपलब्धियों को शिक्षा की गुणवत्ता का प्रमुख आधार बनाया जाए। विद्यालयों में केवल पाठ्यक्रम पूर्ण कराने तक सीमित न रहकर यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चे अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़ने, लिखने एवं गणना करने में दक्ष हों।जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि उपलब्ध आंकड़ों एवं विद्यालयवार शैक्षिक उपलब्धियों का विश्लेषण करते हुए कम प्रदर्शन वाले विद्यालयों की पहचान की जाए। ऐसे विद्यालयों में सुधार के लिए स्पष्ट लक्ष्य एवं समयसीमा निर्धारित करते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक, एआरपी एवं संकुल शिक्षक अपने-अपने स्तर पर नियमित अनुश्रवण करें तथा कमजोर बच्चों को चिन्हित कर उपचारात्मक शिक्षण के माध्यम से उनकी अधिगम क्षमता में सुधार लाएं।जिलाधिकारी ने कहा कि आगामी माह की समीक्षा में प्रत्येक विद्यालय की प्रगति मापनीय रूप में दिखाई देनी चाहिए। जिन विद्यालयों में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है, वहां शिक्षण पद्धति एवं अनुश्रवण व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए।बैठक में विद्यार्थियों की उपस्थिति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि सितंबर माह में जनपद की औसत छात्र उपस्थिति 67 प्रतिशत थी, जबकि अक्टूबर माह में यह 66 प्रतिशत दर्ज की गई।जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि कम उपस्थिति वाले विद्यालयों में अभिभावकों से संपर्क स्थापित किया जाए तथा बच्चों को नियमित विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया जाए।उन्होंने शिक्षकों को कक्षाओं में गतिविधि आधारित शिक्षण, समूहवार FLN गतिविधियों तथा शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।माध्यमिक शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जनपद के राजकीय, सहायता प्राप्त एवं अन्य माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता, नामांकन, शैक्षिक गतिविधियों, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों एवं अवस्थापना सुविधाओं की प्रगति प्रस्तुत की गई।जिलाधिकारी ने राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि शिक्षण कार्य सुचारु रूप से संचालित करने एवं रिक्त पदों के कारण पठन-पाठन प्रभावित न होने देने के उद्देश्य से सेवानिवृत्त शिक्षकों की अल्पकालिक नियुक्ति के संबंध में शासन को पत्र प्रेषित किया जाए।उन्होंने कहा कि विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके।जिलाधिकारी ने सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए कि विद्यालयों में आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के विकास एवं उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए संबंधित खंड विकास अधिकारियों से नियमित संपर्क एवं समन्वय बनाए रखें।उन्होंने कहा कि विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, विद्युत व्यवस्था, कक्षाओं की मरम्मत, फर्नीचर एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही की जाए।
बैठक में प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत विद्यालयों के कायाकल्प एवं मरम्मत कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में उपलब्ध स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब का नियमित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक विद्यालय अपनी दैनिक समय-सारिणी में स्मार्ट क्लास के माध्यम से शिक्षण के लिए निर्धारित अवधि शामिल करे।उन्होंने कहा कि डिजिटल एवं आधुनिक शिक्षण तकनीकों का उपयोग विद्यार्थियों के लिए रोचक एवं प्रभावी शिक्षण वातावरण तैयार करने में किया जाए। स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय एवं विज्ञान प्रयोगशालाओं का उपयोग केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने में इनकी सक्रिय भूमिका हो।बैठक में बताया गया कि जनपद के 22 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर लैब एवं स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध है।जिलाधिकारी ने उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।माध्यमिक शिक्षा विभाग की समीक्षा में जिलाधिकारी ने कमजोर विद्यार्थियों के लिए संचालित उपचारात्मक एवं विशेष कक्षाओं की प्रगति की जानकारी प्राप्त की।उन्होंने निर्देश दिए कि विषयवार मूल्यांकन के आधार पर कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त शिक्षण सहयोग प्रदान किया जाए। प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षिक प्रगति का नियमित आकलन किया जाए।आगामी बोर्ड परीक्षा 2027 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्धारित शैक्षिक कैलेंडर के अनुरूप पाठ्यक्रम पूर्ण कराया जाए तथा नियमित टेस्ट, पुनरावृत्ति एवं प्री-बोर्ड परीक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जाए।उन्होंने विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षक-अभिभावक संवाद, खेलकूद, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों एवं करियर मार्गदर्शन कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन पर भी जोर दिया।जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने कहा कि जनपद में शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता, नियमित अनुश्रवण तथा बच्चों की अधिगम उपलब्धियों में सुधार के लिए सभी संबंधित अधिकारी समन्वित प्रयास करें।उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए विभागीय अधिकारी केवल आंकड़ों की समीक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यालय स्तर पर सकारात्मक एवं मापनीय परिवर्तन सुनिश्चित करें।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता सहित बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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