नो बैग डे’ बना सीखने का उत्सव, गतिविधि आधारित शिक्षा से निखर रही विद्यार्थियों की प्रतिभा
रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर
रचनात्मक, अनुभवात्मक एवं नवाचार आधारित शिक्षण से बच्चों में विकसित हो रहे जीवनोपयोगी कौशल
बलरामपुर।राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बच्चों को रुचिकर, व्यवहारिक एवं गतिविधि आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद के परिषदीय विद्यालयों में ‘नो बैग डे’ का आयोजन उत्साह एवं नवाचार के साथ किया गया। इस पहल के अंतर्गत विद्यार्थियों ने पुस्तकों के पारंपरिक अध्ययन से हटकर विभिन्न रचनात्मक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं जीवन कौशल आधारित गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की।नो बैग डे के दौरान विद्यालयों में बच्चों ने विज्ञान प्रयोग, मॉडल निर्माण, चित्रकला, पोस्टर निर्माण, पेपर क्राफ्ट, फिंगर पेंटिंग, प्राकृतिक सामग्री से कलाकृतियां तैयार करने, पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों तथा समूह आधारित शिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता, रचनात्मक सोच एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रभावी प्रदर्शन किया।
विद्यालयों में आयोजित बाल संसद एवं संवाद सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास किया गया। वहीं पुस्तकालय आधारित गतिविधियों एवं कहानी वाचन कार्यक्रमों के जरिए बच्चों में अध्ययन के प्रति रुचि एवं स्वतंत्र चिंतन की भावना को प्रोत्साहित किया गया।कई विद्यालयों में विद्यार्थियों ने विज्ञान एवं नवाचार आधारित मॉडल तैयार किए, जबकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पौधों, पत्तियों एवं अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से आकर्षक कलाकृतियां बनाईं। वेस्ट मटेरियल से उपयोगी वस्तुएं तैयार कर बच्चों को पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) एवं पर्यावरण संरक्षण का महत्व भी समझाया गया।
नो बैग डे के अवसर पर शिक्षकों ने बच्चों को “करके सीखो” की अवधारणा के अनुरूप शिक्षण प्रदान किया। समूह आधारित गतिविधियों के माध्यम से सहयोग, समन्वय, समस्या समाधान, संचार कौशल एवं टीम भावना जैसे महत्वपूर्ण जीवनोपयोगी गुणों का विकास कराया गया।रंगोली, कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से भी परिचित कराया गया।शिक्षकों ने बताया कि नो बैग डे का उद्देश्य बच्चों पर केवल पुस्तकीय अध्ययन का दबाव कम करना नहीं, बल्कि उन्हें सीखने की ऐसी प्रक्रिया से जोड़ना है, जिसमें वे स्वयं अनुभव करके, प्रयोग करके और रचनात्मक ढंग से ज्ञान अर्जित करें। इससे विद्यार्थियों की जिज्ञासा, आत्मविश्वास एवं नवाचार की भावना को निरंतर बढ़ावा मिलता है।जनपद के परिषदीय विद्यालयों में आयोजित यह अभिनव पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है। गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चे न केवल शिक्षा को आनंददायक बना रहे हैं, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान एवं जीवन कौशल भी सहज रूप से अर्जित कर रहे हैं।