25 हजार रुपये का इनामी अभियुक्त मथुरा से गिरफ्तार
रिपोर्ट ब्यूरो बलरामपुर
बलरामपुर। थाना कोतवाली देहात पुलिस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और फर्जी साक्ष्य प्रस्तुत करने के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त बलदेव सिंह को मथुरा जनपद से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी कर उसे न्यायालय भेज दिया।पुलिस के अनुसार, 13 मई 2023 को न्यायालय के आदेश पर थाना कोतवाली देहात में मुकदमा अपराध संख्या 278/2023 धारा 419, 420, 467, 468 व 471 भादवि के तहत पांच आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था। वादी धर्मेन्द्र सिंह पुत्र अर्जुन सिंह निवासी सुखदेव बुर्ज, थाना बलदेव, जनपद मथुरा ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि आरोपियों ने आपस में षड्यंत्र कर उसके चचेरे भाई चन्द्रवीर उर्फ कालू को फर्जी मुकदमे में फंसाने के उद्देश्य से कूटरचित दस्तावेज और झूठे साक्ष्य तैयार किए।आरोप के मुताबिक, अभियुक्त पवन कुमार ने कथित रूप से अपना फर्जी पता दर्शाकर न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया, जबकि गौरव उपाध्याय ने राकेश कुमार यादव नामक फर्जी अधिवक्ता बनकर वकालतनामा दाखिल किया। वकालतनामा में पंजीकरण संख्या में कूटरचना किए जाने तथा अभिलेख से साक्ष्य मिटाने के आरोप भी लगाए गए थे। इसी मामले में पवन कुमार, गौरव उपाध्याय उर्फ राकेश कुमार उपाध्याय, सीताराम, बलदेव सिंह और हेमलता को नामजद किया गया था।मुकदमे में नामजद अभियुक्त बलदेव सिंह लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार ने 16 जून 2025 को 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया था।पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय एवं क्षेत्राधिकारी नगर अभिषेक सिंह के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक गिरजेश तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 12 अगस्त 2026 को कार्रवाई करते हुए सर्विलांस की मदद से अभियुक्त बलदेव सिंह पुत्र किशन सिंह निवासी औरंगाबाद बालाजीपुरम, थाना हाइवे, जनपद मथुरा को मथुरा से गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक अमित चौहान, कांस्टेबल राज चौधरी, कांस्टेबल रविशंकर, कांस्टेबल सागर (सर्विलांस सेल) और कांस्टेबल अखिलेश (सर्विलांस सेल) शामिल रहे। पुलिस द्वारा अभियुक्त को थाना कोतवाली देहात लाकर आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी की गई, जिसके बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।