सागौन लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की चपेट में दो युवक घायल
हादसे के बाद कटान, परमिट और बिना नंबर प्लेट वाहनों पर उठे सवाल
92 पेड़ों के परमिट का दावा, मौके की लकड़ी उसी अनुमति के तहत थी या नहीं—जांच का विषय
बलरामपुर। थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के ग्राम गणेशपुर कोड़री के पास गुरुवार देर रात सागौन की लकड़ी से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की चपेट में आने से दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लकड़ी लदे वाहनों, उनकी नंबर प्लेट और लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।बताया जा रहा है कि दुर्घटना में शामिल स्वराज ट्रैक्टर संख्या UP43 AD 3392 के पीछे सोनालिका ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा एक अन्य स्वराज ट्रैक्टर-ट्रॉली लगी हुई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी और उन पर सागौन की लकड़ी लदी हुई थी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वाहनों के वैध दस्तावेज और लकड़ी के परिवहन से संबंधित अभिलेख मौके पर मौजूद थे या नहीं।हादसे में हेमंत चौहान पुत्र नान बाबू तथा कधाई चौहान पुत्र उदायचंद, निवासी ग्राम प्रतापपुर थाना ललिया, घायल हुए हैं। बताया गया कि दोनों युवक अपने भाई की ससुराल ग्राम गणेशपुर कोड़री में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। इसी दौरान हादसा हो गया।घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 और कोतवाली नगर पुलिस मौके पर पहुंची। एंबुलेंस की मदद से दोनों घायलों को जिला मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी बताया गया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल बताए जा रहे स्वराज ट्रैक्टर UP43 AD 3392 को कब्जे में लिया है।
92 पेड़ों के परमिट का दावा, मौके की लकड़ी पर सवाल
मामले में लकड़ी ठेकेदार ननकू तिवारी निवासी इडियट की ओर से बताया गया है कि उनके नाम से कुल 92 पेड़ों का परमिट बना हुआ है। अब जांच का अहम बिंदु यही है कि मौके पर काटे और परिवहन किए जा रहे सागौन के पेड़ वास्तव में उसी परमिट के अंतर्गत थे या नहीं।
इसके साथ ही वन विभाग के लिए यह भी जांच का विषय है कि परमिट में दर्ज पेड़ों की संख्या, प्रजाति, कटान स्थल, लकड़ी की वास्तविक मात्रा और मौके से बरामद/परिवहन की जा रही लकड़ी में आपसी मिलान होता है या नहीं।
रात की ढुलाई और बिना नंबर प्लेट वाहनों ने बढ़ाए सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय सागौन की लकड़ी की कटान और ढुलाई की जा रही थी। मौके पर वन विभाग की टीम के पहुंचने की भी बात सामने आई है। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर है कि विभागीय टीम ने मौके पर क्या कार्रवाई की और लकड़ी तथा वाहनों के संबंध में कौन-कौन से दस्तावेजों की जांच की गई।हादसा महज सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया है। लकड़ी की वैधता, 92 पेड़ों के परमिट, परिवहन दस्तावेज, वाहनों की नंबर प्लेट और रात में हो रही कथित ढुलाई—इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।फिलहाल पुलिस और वन विभाग की जांच का इंतजार है। यदि लकड़ी और वाहनों के दस्तावेज नियमानुसार पाए जाते हैं तो स्थिति स्पष्ट होगी, वहीं किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
