वैज्ञानिक बेटी पूजा ने बनाया धूल रहित थ्रेसर मॉडल, राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना
संवाददाता – के के यादव
बाराबंकी। गरीबी और सीमित संसाधनों के बीच भी अपनी लगन, प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच से देश का नाम रोशन कर रही बाराबंकी की पूजा ने एक धूल रहित थ्रेसर मॉडल विकसित किया है, जो गेहूं की मड़ाई के दौरान निकलने वाली धूल को थैले में जमा करता है। इससे न केवल मड़ाई की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि आसपास के बच्चों व किसानों को सांस लेने में होने वाली परेशानी भी कम हो जाती है।डलईपुरवा मजरे विरौली की रहने वाली पूंजा पुत्तीलाल पाल की बेटी है, जो एक सामान्य मजदूर परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनका परिवार फूस की झोपड़ी में रहता है। पूंजा वर्तमान में उच्च प्राथमिक विद्यालय अगेहरा में कक्षा आठ की छात्रा हैं। चार वर्ष पूर्व जब स्कूल में वे पढ़ रही थीं, तब उन्होंने देखा कि थ्रेसर से निकलने वाली धूल से बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने अपने विज्ञान शिक्षक से इस समस्या का समाधान सुझाया और फिर अपनी मेहनत और लगन से धूल रहित थ्रेसर का मॉडल तैयार किया।यह मॉडल टिन और पंखे की मदद से बनाया गया है, जिसमें पंखा धूल को बाहर उड़ने के बजाय एक थैले में जमा कर लेता है। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर बेहद सराहा गया है। पूंजा को इंस्पायर अवार्ड योजना के तहत चुना गया है, जिसमें देश भर के करीब 8 लाख बच्चों से केवल 60 बच्चों का चयन हुआ है। पूंजा 14 जून को जापान इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाएंगी।
पूजा ने बताया कि सीमित संसाधनों और साधारण परिवेश के बावजूद उनकी लगन और नवाचार ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उनका यह मॉडल न केवल उनके गांव बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पेटेंट कराने के लिए सहमती भी दे दी है।बाराबंकी की इस वैज्ञानिक बेटी की कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा और मेहनत से गरीबी को मात दी जा सकती है और बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। पूजा का यह प्रयास ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।