डीएम की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति एवं जिला गंगा समिति की बैठक संपन्न
रिपोर्ट – ब्यूरो बलरामपुर
चित्तौड़गढ़ जलाशय को रामसर साइट के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में बढ़े कदम
डीएम ने संबंधित विभागों को तेजी से कार्यवाही पूर्ण करने के दिए निर्देश, सुआंव नदी के पुनर्जीवन एवं आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर भी जोर
बलरामपुर।जनपद के चित्तौड़गढ़ जलाशय को अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है ।जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन की अध्यक्षता में आयोजित जिला पर्यावरण समिति, जिला गंगा समिति एवं जिला वृक्षारोपण समिति की बैठक में इस दिशा में चल रही कार्यवाही की प्रमुखता से समीक्षा की गई।सोहेलवा वन्यजीव अभयारण्य के रामपुर रेंज में स्थित चित्तौड़गढ़ जलाशय को रामसर साइट के रूप में नामित किए जाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश जिलाधिकारी ने दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय से आवश्यक सूचनाएं एवं डाटा शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा, जिससे आगे की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जा सके।जिलाधिकारी ने चित्तौड़गढ़ जलाशय से संबंधित आवश्यक डाटा उपलब्ध कराने के लिए अधिशाषी अभियंता चित्तौड़गढ़ बांध अखिलेश कुमार सिंह को नोडल अधिकारी नामित करते हुए आगामी 4 से 5 दिनों के भीतर आवश्यक डाटा संकलित करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोतों एवं आर्द्रभूमियों का संरक्षण पर्यावरण एवं जैव विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।चित्तौड़गढ़ जलाशय को रामसर साइट के रूप में पहचान मिलने की दिशा में सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करें।बैठक में सुआंव नदी के पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गई।सुवांव नदी के पुराने प्रवाह क्षेत्र से जुड़ी पांच आर्द्रभूमियों एवं जल निकायों को चिन्हित किया गया है। इनके संरक्षण एवं बेहतर प्रबंधन की दिशा में आगे की कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने संबंधित क्षेत्रों का आवश्यकतानुसार स्थलीय निरीक्षण करते हुए उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन करने को कहा।इसके साथ ही वृक्षारोपण अभियान के तहत जनपद में रोपित पौधों की स्थिति की समीक्षा की गई।जिलाधिकारी ने कहा कि पौधरोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। संबंधित विभाग अपने-अपने पौधरोपण स्थलों की नियमित निगरानी करें तथा पौधों की बेहतर जीवितता सुनिश्चित करें।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधरोपण तक सीमित न रहे, बल्कि नदियों, तालाबों, आर्द्रभूमियों एवं प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता , प्रभागीय वनाधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।